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What does the festival of Holi teach our kids?

importance of holi

When we think about the most enjoyable, enthusiastic and fun-filled Indian festival, undoubtedly the festival of color – Holi comes to our mind. It marks the arrival of the spring season which is the king of seasons. Holi indicates the arrival of new colors in nature. Everybody enjoys this day and for many children Holi is their favourite festival.

 

Most of the stories related to festivals have moral teaching. Kids love to hear stories,and therefore teachers and family members must educate children about the historic and mythological stories related to each festival. Tell children the legendary story of Holi by telling them about Holika, Hirankashyap, Prahalad, and Narasimha and teach them the difference between good and evil.

 

Every festival comes with its own history and it is our responsibility to pass on the learnings from each festival to our kids to make the celebrations more meaningful.

 

Holi is also the most playful way to teach kids about colors so they can relate them in a better way.  On the occasion of Holi, let your child play with colours and make related art and craft activities. Holi can be a perfect time to give wings to your child’s imaginations through creative activities like making Holi banners and cards with creative design and patterns. 

 

There is so much to learn from festivals. For instance, we put colors on each other in the Holi festival without thinking about social barriers of religion, caste and economics. These different colors but the same hue and this sends a clear message of unity. Pass such messages and learnings to your kids.

 

Every festival in India is a great family get together which brings the members closer to each other. Tell your kids how important it is to make a strong bond with family members, relatives and friends. Teach your child the importance of family and its values.

 

Let your child participate and enjoy festivals the fullest. Make sure this Holi, you teach your kids new lessons for lifelong learning.

 

We at UC Kindies International Pre-school celebrate all festivals with our kids through various types of creative activities and encourage them to participate in it. We also tell our kids stories related to each festival so as to make every festival more meaningful to them.

 

अपने बच्चे के लिए प्रीस्कूल कैसे चुने ?

एक शोध के अनुसार, प्रीस्कूल के एक गुणवत्ता कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों में कुछ साल बाद उन्हें उच्च शिक्षा में मदद मिलती है और गणित के सवाल आसानी से हल कर लेते हैं और वे हर क्षेत्र में सफलता हासिल करते हैं। हालांकि यदि आप अपने बच्चे के लिए प्रीस्कूल देख रहे है या सोच रहे है या तलाश शुरू कर दी है तो जल्द बाजी न करे, हो सकता है की आपके शोध में कुछ कमी हो, अधिकांश माता-पिता अपने बच्चे के लिए समय से पहले प्रीस्कूल की शोध और देखने की योजना शुरू कर देते हैं।

अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा प्रीस्कूल कैसे चुनें? तो इन बातो का ध्यान दे जो आपको सही चुनाव करने में सहायता करेंगी ! आइये आगे देखते है कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आपके प्रीस्कूल चुनाव में मदद करेंगे —

प्रीस्कूल देखना कब शुरू करना चाहिए?

प्रत्येक प्रीस्कूल में एक अलग प्रवेश प्रक्रिया और समय रेखा होती है। यदि किसी स्कूल में प्रतीक्षा सूची है, तो आप अपने बच्चे को जन्म लेते ही जोड़ सकते हैं। आमतौर पर, आपको जुलाई से पहले या एक साल पहले से देखना शुरू करना हैं। क्या आपका बच्चा वास्तव में प्रीस्कूल जाना शुरू करेगा या नहीं, आमतौर पर २ साल या 4 साल  की उम्र के आसपास आपका बच्चा तैयार हो जाता हैं। कुछ माता-पिता २ साल की उम्र में अपने बच्चों को प्रीस्कूल भेजने का विकल्प चुनते हैं, शोध के अनुसार २ साल की उम्र सही होती है, जो की उसके प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक हैं। लेकिन कभी-कभी अगले वर्ष की प्रतीक्षा करने के बजाय आपको बच्चे को प्रीस्कूल कार्यक्रम में दाखिला दिला देना चाहिए।

अपने बच्चे को प्रीस्कूल के लिए कैसे तैयार करे

आपका बच्चा जब पहली बार प्रीस्कूल में जाता है तो वह सबसे अनजान होता हैं। भविष्य में अपने दोस्तों के साथ तालमेल कर पाए ताकि वह अन्य बच्चों के साथ और आपसे अलग होने के साथ अधिक सहज सामाजिकता महसूस करे। बच्चा ज्यादा समय अपनी माँ के साथ होता है  अपनी माँ से वो बेहिजक सब कहता है और बात सुनता है, प्रीस्कूल में जाने से पहले आप अपने बच्चे को स्वतंत्र बनाये, बोलने में, और सही गलत समझने में, अच्छी बुरी आदत, कब कैसे बर्ताव करना है, दिन की सभी गतिविधिया अच्छे से अपने बच्चे को सिखाऐ साथ ही उसे प्रारम्भिक शिक्षा भी दे जिससे उसे चीजे समझने में आसानी होगी ।

यदि आप उसे आत्मनिर्भर होना सिखाते हैं – अर्थात्, खुद से खा ले, अपनी जैकेट और अपने बैग तैयार करना, बंद करना खोलना और निश्चिंत होकर अपनी बात कहना जब वो असहज महसूस करे तब वो अपनी बात सरलता से कह पाए ।

प्रीस्कूल (पूर्वस्कूली शिक्षा) और डे केयर (झूलाघर) के बीच अंतर क्या है?

प्रीस्कूल को औपचारिक शिक्षा माना जाता है, लेकिन यह आमतौर पर किंडरगार्टन (बालवाड़ी) से पहले एक से तीन साल की स्कूली शिक्षा को संदर्भित करता है। डे केयर आमतौर पर बच्चों को 2- 5 वर्ष की आयु तक बच्चे की देखभाल प्रदान करता है। परन्तु कुछ डे केयर 2 से 12 वर्ष तक भी यह सुविधा प्रदान करते है यदि आपका बच्चा 2 या 3 वर्ष का है और उसे प्रीस्कूल उम्र के बच्चों के साथ डे-केयर कक्षा में रखा गया हैं और उसके पास एक शिक्षक है जो एक निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करता है। संरचित शिक्षण गतिविधियों के साथ, वह मूल रूप से प्रीस्कूल में हैं।

तो अब आपको यह निर्धारित करना है की आप जिस प्रीस्कूल को चुने वह प्रीस्कूल प्रोग्राम (प्लेग्रुप) अलग हो और डे केयर प्रोग्राम अलग हो । क्योकि इन दोनों में शिक्षण गतिविधिया अलग अलग होती है जब बच्चे की शुरुआती विकास में बहुत अहम् भूमिका निभाती हैं|

आपका बच्चा क्या सीखेगा?

प्रीस्कूल में आपका बच्चा क्या सीखेगा ? यह सवाल हर माता पिता के मन में रहता है, यदि आपका बच्चा निश्चित रूप से प्रीस्कूल गतिविधियों में रंग भरना, चित्रकारी, कागज की कलाकृति बनाना, किताब पढना, शब्द पहचानना, और बाहरी दुनिया के बारे में जानने जैसी क्रिया करेगा और कहानी सुनने के लिए सभी बच्चो के साथ बैठेगा, उसे साझा करने, सहयोग करने, संघर्षों को हल करने और स्वतंत्र होने में भी अभ्यास करने को मिलेगा। ये सामाजिक और भावनात्मक कौशल – किंडरगार्टन (बालवाड़ी) और सामान्य रूप से जीवन के लिए उसे तैयार करने में मदद करेंगे। वास्तव में, किंडरगार्टन शिक्षकों के एक अध्ययन के अनुसार, 95 प्रतिशत ने कहा कि जिन बच्चों ने प्रीस्कूल में भाग लिया था, वे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से बेहतर तैयार थे। स्कूल के परिणाम को देखे बिना, वे बता सकते थे कि कौन से बच्चे अपने साथियों के साथ खेलते थे, कक्षा में व्यवहार करते थे, और पढ़ने के कौशल और गणित की अवधारणाओं के साथ अच्छा प्रदर्शन करते थे।

मातापिता किस प्रकार के प्रीस्कूल चुन सकते हैं?

प्रीस्कूल कार्यक्रमों के बीच एक मुख्य अंतर यह है कि पाठ्यक्रम कैसे संरचित हैं। स्कूल इस बात में भी भिन्न हैं कि वे सामाजिक और भावनात्मक कौशल और शैक्षणिक कौशल के निर्माण पर कितना जोर देते हैं, शिक्षक छात्रों के साथ कैसे बातचीत करते हैं, और किस तरह के खिलौने और सामग्री का उपयोग किया जाता है। बच्चो की सुरक्षा और स्कूल की साफ सफाई के क्या नियम है और किस तरह से संचालित किये जा रहे हैं। अन्य कार्यक्रमों में शिक्षण या “पारंपरिक” प्रीस्कूल शामिल हैं |

अमेरिका में सबसे लोकप्रिय दृष्टिकोण, जिसे “प्ले-बेस्ड” या “डेवलपमेंटली” शिक्षण के रूप में जाना जाता है, यह मानता है कि बच्चे खेल के माध्यम से सबसे अच्छा सीखते हैं। इन कार्यक्रमों में छात्र आम तौर पर अपनी गतिविधियों को चुनते हैं और अपनी गति से सीखते हैं।

प्रीस्कूल विजिट के दौरान क्या देखना चाहिए?

प्रीस्कूल में अलग-अलग खेल गतिविधियों के लिए क्षेत्र होने चाहिए, जैसे कि एक किताबी नुक्कड़ नाटक, पहेली, अंक तालिका और एक लाइब्रेरी, क्लासरूम, रंग बिरंगे खिलोने, खाने के प्रकार, फ़ूड जोन, रेस्ट रूम, बाथरूम, और साफ सफाई । दीवारों पर चित्रकारी – कलाकृति के नमूने हैं? आपको तस्वीरें देखनी चाहिए, लेकिन उन सभी को एक ही तरह से या समान रंगों के साथ नहीं खींचा गया (जब बच्चों के लिए दर्शाई गयी चित्रकारी हो, तो यह दर्शाता है कि स्कूल रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है)। आपको सुरक्षा प्रक्रियाओं के बारे में भी पूछना चाहिए। अगर आपके अलावा कोई और आपके बच्चे को उठा रहा है, तो क्या स्कूल उसकी पहचान की जांच करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह अधिकृत देखभाल करने वालों की सूची में है या नहीं? समय नियम क्या है, बिना पूछताछ और पहचान के स्कूल प्रांगण में प्रवेश अनुचित नहीं है और भी बहुत सी बाते है जो आपको सुनिश्चित करना हैं |

एक अच्छा प्रीस्कूल कैसे मिल सकता है?

अन्य अभिभावकों से बात करें। खेल के मैदान पर मिलने वाले दोस्तों और अन्य आस पास वाले पडोसी या अपने दोस्तों से बात करें। कुछ प्रीस्कूल डेमो आमंत्रित करते हैं जहां आप विभिन्न निर्देशकों से मिल सकते हैं और एक साथ कई कार्यक्रमों के बारे में जान सकते हैं। आप आपके नजदीकी  यूसी किंडीज़ इंटरनेशनल  प्रीस्कूल पर आकर अधिक जान सकते हैं, –  संपर्क करे – 9111-6111-07 या देखे www.uckindiesmp.com  

Preschool

Why is Play important in Preschool classrooms?

The first five years of life involves speedy and critical development in a child. Preschool is therefore an important foundation for learning. A good preschool lays a strong foundation for a child and prepares the child for higher education. Children at this age come from a sheltered environment and therefore attending a preschool helps them understand the basics of life and helps them retain the lessons learnt throughout life.

Encouraging children to play and explore helps them learn and develop socially, emotionally, physically and intellectually. The importance of play in cognitive development cannot be overlooked. Children’s play involves exploration, language experimentation, cognition, and the development of social skills. Kids need an opportunity to play outdoors daily, not only to induce fresh air but also because it fosters cooperation, learning, and creativity, and sparks an interest within the nature. Children need to climb, jump, run, pick up sticks, jump in puddles and learn that sometimes it is fine to fall.

Play based curriculum helps in brain growth and nurtures the executive functions of the brain. Play helps children learn better, retain better and enjoy the learning process. Play teaches kids various qualities and social skills such as to reason, use logic, plan and work with others, sometime to lead and at times to follow, to win and to lose, team spirit, among other such qualities. When we think about play based learning, we often consider free play, which is unstructured and directed by children, usually without adult involvement.  Although, play-based learning is more usefully seen as a spectrum, with free play at one end and teacher-guided playful learning at the other end. In between there is a range of methods, either entirely supported play or incorporating elements of it.

The follow are the benefits of learning through play:

  1. Play Encourages Communication

Play gives an opportunity for children to develop speech, language and listening skills. Children talk and listen while they play. The more vocabulary a toddler is exposed to on a day-to-day basis, the greater the range of words a toddler will incorporate into play.

  1. Play Improves Cognitive Development

Children who engage in play tend to possess more sophisticated levels of interaction with others. While playing, children engage in solving problems, creating, experimenting, thinking and learning all the time. Therefore, play supports your child’s cognitive development – that is, your child’s ability to think, understand, communicate, remember, imagine and work out what might happen next.

  1. Play Encourages Relationship Building

While playing, children learn the art of building social relationships with their peers and teachers. As play becomes more important during a child’s life, a rise within the number and quality of friendships has been seen. In fact, development of social skills is equally important for language development in a child.

Considering these benefits of play, we recommend you look for a preschool where the faculty understands the importance of free and guided play.

 

 

 

Preschool For Your Child

Are You Looking For A Preschool For Your Child?

Choosing the right preschool can be a tough decision! Friends and neighbours can be a good source of information that know about the preschool, but it is important to do your own research too. We believe every child is unique. If you want to give your child a strong and dedicated learning experience from an early age, the following factors can help you in finding the right preschool for your child.

1. Who teaches the kids? 

A quality preschool has trained teachers who can handle kids. Make sure well-trained preschool teachers who have knowledge about ‘early childhood education’ are available in the preschool. Apart from formal training, a good teacher displays a passion for working with kids. She maintains good relationships with the kids and their parents, share their love and interest in books and learning, and manages the kids in a caring way.

2. How does the classroom look? 

A preschool classroom must be safe, vibrant, colourful and hygienic. It must sparkle children’s mind and stimulate creativity. Major development of a child’s brain takes place within early years, therefore it is important to expose the child to various activities or things that he finds interesting. Colorful, play-friendly, safe environment is a must. When a child enters the classrooms, it should have an aura that encourages the child to play, discover things and indulge in the activities available there. 

3. How do the kid’s invest their time? 

A good preschool classroom is a busy place! Kids interact with lots of different kinds of toys, equipment, construction materials, picture books, art material, games, puzzles, and much more. The daily routine and schedule should include whole-group time as well as other time during which kids can choose what they’d like to work on, and they are able to work alone or in small groups. The preschool must have an indoor and outdoor play zone area where kids can play.

4. What kind of infrastructure and facilities does the preschool offer?

A good preschool offers modern facilities and world class infrastructure for your child such as digital learning resources, extensive library, science lab among other such facilities. A preschool must offer hygienic and safe facilities along with spacious classrooms. 

Some other important factors to be considered while selecting a good preschool are:
5. Curriculum
6. Hygiene & Safety Measures
7. Environment & Policies
8. Performance & Result
9. Parent Feedback



डे केयर का चुनाव कैसे करे ?

Daycare

आजकल  कामकाजी महिलाओं के लिए अपने बच्चों की देखरेख करना एक बड़ी चुनौती होती है। कामकाजी महिलाएं अपने बच्चे को लेकर चिंतित रहती है की उनके बच्चे की देखभाल और खानपान कैसे होगा और समग्र विकास जैसे बौद्धिक और शारीरिक विकास भी सही तरह से हो पाए। |

जब हमारे बच्चे के लिए एक डेकेयर चुनने की बात आती है, तो हमें अपने फैसले के बारे में सुनिश्चित होना चाहिए और कोई गलती न करे । अपने बच्चे के लिए एक डेकेयर सिर्फ एक जगह नहीं है जहां आप अपने बच्चे को देखभाल के लिए भेजते हैं। बच्चों की अच्छी देख-रेख के लिए डे-केयर उनके काम आते हैं। पर डे-केयर का सहारा लेने से पहले अकसर ही लोगों को असमंजस का सामना करना पड़ता है। खुद से दूर बच्चे को दिन भर के लिए अनजान हाथों में सौंपना आसान तो नहीं होता। अपने बच्चे के लिए डे-केयर का चुनाव करते वक्त किन-किन बातों का ध्यान रखें, आईये जानते हैं –

खुद पर करें भरोसा:

आप मां हैं और अपने बच्चे के लिए बेहतर ही सोचेंगी। इस बात को आपसे ज्यादा अच्छी तरह से और कोई नहीं जानता। आप खुद की इस सोच पर पूरा भरोसा रखें। बच्चे के पालन-पोषण और खुद के सपनों को पूरा करने के लिए किसी की मदद लेना गलत नहीं है। बच्चे के लिए आपका ये निर्णय वैसा ही है, जैसा उसको किसी स्कूल में भर्ती कराना।

उम्र का रखें ध्यान

डे-केयर सेंटर से ज्यादा जरूरी है आपका बच्चा। जल्दबाजी न दिखाएं। बच्चे को मां और बाहर की दुनिया पहचानने का मौका दें। यह पहचान उसे डेढ़ साल की उम्र तक में हो जाती है। बच्चे को इसके बाद ही डे-केयर में डालें। डे-केयर सेंटर में अपने बच्चे को छह साल की उम्र तक ही रहने दें। इसके बाद उसे डे-बोर्डिंग में डालना बेहतर रहता है। इससे आपका बच्चा अनुशासित बनता है।

प्रतिष्ठित संस्था (डेकेयर) का चुनाव : 

अगर आप कामकाजी महिला है तो आप अपने बच्चे के स्कूल में, या ऑनलाइन सामाजिक समूहों पर बात करके अपने आस पास के अच्छे डेकेयर केंद्रों का पता लगाएं। हमेशा दोपहर या शाम के समय (आमतौर पर डेकेयर जाने आने का समय) के दौरान उन अन्य अभिभावकों से बात करें, जिनके बच्चे डेकेयर में हैं, इसलिए वे आपको इस बारे में उचित विचार दे सकते हैं कि डेकेयर सेंटर कैसे संचालित होता है और क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध है। आप खुद भी डेकेयर देख सकती है | अधिकांश डेकेयर केन्द्रो के पास फेसबुक पेज भी हैं जहां आप सुझाव के लिए उन अभिभावकों से बात कर सकते हैं।

जब सवाल हो सुरक्षा का :

डेकेयर का चुनाव करने में आपको उसी तरह पेश आना होगा, जैसे आप बच्चे के लिए किसी स्कूल का चुनाव करेंगी। डेकेयर की दिनचर्या जानना, वह काम करने वालों की योग्यता आदि की पुष्टि करना, डेकेयर की लोकप्रियता, वहां होने वाली तरह-तरह की गतिविधियों जैसी तमाम बातों पर संतुष्ट होने के बाद ही इस मामले में अंतिम निर्णय लें। कुछ और बातें भी डे-केयर में बच्चे की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हैं। सुरक्षित परिसर, स्वच्छ खानपान, आपातकालीन सुविधाएं और सीढ़ियों, जैसी बातों को सुनिश्चित करें। साफ- सफाई पर ध्यान दें। डे-केयर पंजीकृत है या नहीं, यह जांचें। बच्चों की संख्या के अनुसार स्टाफ देखें। बच्चे अगर बहुत छोटे हैं तो 3 या 4 बच्चों पर एक देखभाल करने वाला होना चाहिए। डे-केयर में प्ले ग्राउंड की व्यवस्था के साथ ही यह भी देखें कि वहां बच्चों के लिए कई तरह की गतिविधियां उपलब्ध हों। वहाँ का अनुशासन क्या है यह पता लगाएं कि वे कितने अनुशासित हैं। क्या वे नियमों का पालन कर रहे हैं? क्योकि आपके बच्चे की सुरक्षा सवाल है | आपके बच्चे की सारी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी ही है इसलिए उनके नियम भी सुनिश्चित करे |

खाद्य और पेय पदार्थों की जाँच करें:

डे केयर में, जहां दिन का भोजन दिया जाता है, भोजन के बारे में की वो कितना शुद्ध है, इस पर सवाल पूछें। क्या वे जंक फूड को प्रतिबंधित करते हैं? क्या वे आपको पौष्टिक भोजन भेजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं? क्या भोजन को परिसर में एक बुनियादी स्वच्छ रसोई में पकाया जा रहा है या वे बाहर से खाना ला रहे हैं। इसके अलावा, एक सप्ताह के भोजन योजना की जांच करें ताकि यह पता चल सके कि वे वहां के बच्चों के लिए दैनिक और साप्ताहिक भोजन क्या है |

शिक्षक-बालअनुपात:

विचार करने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिक्षक अनुपात क्या है? यदि संभव हो तो आप उनसे भी मिलने की कोशिश कर सकते हैं, उनके साथ बातचीत कर सकते हैं और देख सकते हैं कि क्या आपको लगता है कि आपका बच्चा वहां सहज होगा। आदर्श रूप से 12-15 प्री-स्कूलर्स के एक समूह को उन्हें प्रबंधित करने के लिए 2 शिक्षकों और 2 सँभालने वालो की आवश्यकता होती है।

गतिविधियाँ योजना :

पता लगाएँ कि डेकेयर में किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं? क्या उनके पास बहुत सारी शारीरिक और मानसिक  गतिविधियां, कहानी और कविताओं की गतिविधियों के लिए कार्यक्रम हैं | आप केंद्र प्रबंधकों से इस बारे में सीधे पूछ सकते हैं। वे आपके साथ एक समय सारिणी साझा करने में सक्षम होंगे। परिसर में होने वाली और परिसर के बाहर होने वाली गतिविधिया जैसे भ्रमण, चिड़ियाघर, बाग़ बगीचे की सैर आदि |

बोर्ड और प्रबंधन:

पता लगाएँ कि क्या डेकेयर एक बोर्ड / ट्रस्ट / फाउंडेशन द्वारा या केवल व्यक्तियों द्वारा चलाया जा रहा है। डे केयर कितना प्रतिष्ठित और पहचाना हुआ है | सुरक्षा भावना से देखे तो वह पर सुरक्षा के नियम और साधन क्या क्या हैं। जो आपके बच्चे के लिए आपातकालीन स्तिथि में जरुरी हो सकते है |

स्वच्छता :

ऐसा डेकेयर चुनें जिसमें अच्छा वातावरण हो। परिसर में साफ सफाई की गुणवत्ता, फर्नीचर, वॉशरूम आदि पर ध्यान दिया जाता हो।

क्या आपका बच्चा डे केयर में वास्तव में खुश है।:

कई बार माता-पिता महत्वपूर्ण बातों को ध्यान देना चाहिए क्योंकि कुछ ऐसे बिंदु है उन्हें समझने की जरुरत है|

डे केयर में आपका बच्चा कितना घुलमिलकर दूसरे बच्चो के साथ रहता  है | खेल – खेल में दूसरे बच्चो के साथ किस तरह का व्यवहार करता है या आपका बच्चा ज्यादातर अकेले में रहना पसंद करता है और बहुत कम बोलता है, कुछ खाने पीने में असहज महसूस करता है | डे केयर वापस जाने में उसे हिचकचाहट होती है | तो ये सब बातें आपको चिंता में डाल सकती है इसका मतलब आपका बच्चा डे केयर में सहज व्यवहार नहीं कर रहा है और वो खुश नहीं है इस तरह की स्तिथि में आपको डे केयर में बात करना चाहिये और वहां जाकर देखना चाहिए |

क्या आपका बच्चा सहज है?:

जब बात आपके बच्चे को डे केयर में रखने की हो यह एक अहम सवाल है।  बच्चे में कुछ लक्षणों की पहचान कर आप उसकी असहजता को जान सकती हैं। डे-केयर से बच्चे को लाने पर अगर वह रोने लगे, मां को घर पर भी खुद से अलग न होने दे, वह वहां मौजूद किसी सदस्य से डरता है और इसलिए अपनी निजी जरूरतों को खुलकर नहीं बोल पा रहा हो । इसके अलावा अगर डे-केयर का स्टाफ बात-बात पर शिकायत करता रहता है तो भी आपका बच्चा वहां सहज नहीं है ।

एक अच्छा डेकेयर आपके बच्चे के समग्र विकास को बढ़ावा दे सकता है, जहा बच्चे को उसकी रूचि खोजने और उसके बौद्धिक, शारीरिक विकास में मदद कर सकता है  जैसे यू सी किन्दिस इंटरनेशनल प्रीस्कूल जहा सारी मुलभुत सुविधाओं को ध्यान में रखकर डेकेयर विकल्प दे रहा है जहाँ बच्चो के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाता है, और आगे की चुनौतियों के लिए बच्चे को तैयार कर सकता है।

What Is The Importance Of Being A Mentor To The Little Ones?

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In today’s world, where most parents are bogged down by their daily routine and technological bombardment and tired from their jobs, most onus for everyday learning comes on the teachers.

In a high quality teaching environment it is crucially important to build relationships with children and pay a lot of attention to their thinking process developing and opening channels of communication with the young individual. It’s the teachers’ responsibility to open all their senses to the child’s needs before expecting them to follow instructions.

A high quality teacher would spend adequate time for curriculum planning and reflection. They attend carefully to the child’s language and find ways to make them think aloud or find answers to everyday problems. Guidance in such cases is minimal, offering just enough assistance to be helpful but not so much or so little that we end up completing the task for the child. Concepts and ideas and understanding need to be built into the curriculum before worksheets and guided help are given.

Any preschool proud of its curriculum incorporates complex cognitive and interpersonal skills like self-regulation, self-direction, developing individual perspective, forming connections, critical thinking and willingness to try new challenges.

Such high quality teachers provide ample opportunities to hear and use complex, interactive language. Their planning supports learning processes and a wide range of socio-emotional skills and active everyday practical learning. These teachers would also involve the parents in the child’s learning to take it the required distance.

Having observed a lot of teacher’s enthusiasm for class decoration; there is growing evidence that material clutter negatively affects learning. As visual distraction increases, the child’s ability to focus, stay on task and learn new information decreases. So, do look out for a clean clutter free hygienic environment in the school you choose.

All in all I would like to end with- the best of teachers is a failure if she fails to ignite the flame of inborn curiosity. As Maria Montessori said in a note sent home to the parents, that if we parents failed to recognize evidence of learning in a child who spent the whole day immersed in stories and blocks or trying to make a Styrofoam boat stay afloat, well, that was going to be our problem , not our child’s.

How To Develop Healthy Eating Habits In Children?

healthy eating habits

Investing in early childhood nutrition is incredibly important for the growth and development of the child. A healthy mind and body are essential to living a healthy life.

If you’re just waking up, you probably haven’t eaten in at least 10 hours. Don’t head out before fueling up! Breakfast literally means “breaking the fast”. A healthy breakfast can give you and your kids a sharper mind, more energy, and better total nutrition for the day. A balanced breakfast includes protein, carbs, and fiber.

Does your child wake up early enough to have a healthy breakfast before heading to school? Setting a routine for young kids is a difficult yet important task to be done by parents. A good routine sets good habits from an early age. An ideal routine for a child includes waking up at least an hour before school, having milk and a little breakfast before leaving for school. Of course, remember biscuits is not breakfast!

Kids can be fussy when it comes to food.

Children need love. Children need boundaries. Children also need someone to look up to and learn from. Your job as a parent is to lead by example, modeling the kind of behavior that you want your kids to adopt. One of the easiest ways to get your child interested in eating vegetables and fruits is to eat yours. Be a good role model for your child. Toddlers love to do what parents do. The key is to keep trying and not get frustrated. Try new and interesting recipes for your child and sometimes even provide a combination of their favorite dish with something new. This is a learning process for both the child and the parent and it takes time for the child to acquire a taste for new food.

Here are some tips to make healthy eating a habit for your child.

  1. Do not fixate on the amount of food. Sometimes, it is all right if the child does not finish his meal.
  2. Do not make mealtimes a battle.
  3. Do pay attention to adopting healthy eating habits—including sitting as a family at mealtime.
  4. Do make healthy food choices as a family. Be a good role model for your child.
  5. Let your child eat food independently. It’s all right if he does not finish his food on somedays.
  6. Make greens fun and get innovative with your recipes. Mix vegetables into delicious soups, prepare vegetable puree for plates of pasta or even shred beetroot or carrots and mix them into burger patties.
  7. If your child does not drink milk then custard, fruit smoothies, buttermilk are good options.
  8. Introduce one new food at a time.
  9. Avoid sugary drinks and sugar-rich food from an early age. Offering sweets, ice creams, cold drinks as rewards lead to unhealthy eating in the future.
  10. Try and concentrate on multi-nutrient rich food, instead of calorie-dense foods.
  11. Identify the time when the child is hungry and plan meals accordingly.
  12. Make children eat small and frequent meals at least once in 2 hours.
  13. Restrict fluid intake before meals to ensure the child is not full before the meal.
  14. Promote healthy snacking habits from the very start.
  15. Say no to ‘screen time’ while eating food. So no television, mobile phones or iPads while eating.

Whether they are toddlers, preschoolers or teens, simply follow these healthy eating tips and tricks to make mealtime fun for your kids. Your children are not born with a craving for junk food and an aversion to cucumber and carrots. This habituation happens over time as kids are exposed to more and unhealthier food choices. Therefore, as parents, it is very important for you to help your kids make the right choice at an early age to develop good habits for the future.

Why Is Preschool Education Important?

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How do high-quality preschools benefit children’s learning and development? And what features should parents look for in a preschool program?

One answer to these questions is that the staff at high-quality preschools and child care programs understand the particular ways that young children develop and learn. And they organize space, time and activities to be in sync with children’s social, emotional, cognitive, and physical abilities.

Young children learn social skills and emotional self-control in “real time.” Three- and 4-year-olds learn through their experiences and good teachers make time for those “teachable moments” when they can help children learn to manage frustrations or anger. They don’t automatically step in to resolve children’s conflicts for them; they have a well-honed sense of when to let children work out their own problems and when to intervene. Without shaming a child, they encourage her to notice the impact of her aggressive or hurtful behavior on another child.

 Teachers appeal to a young child’s desire to engage in “real work” by offering him chances to help out in the classroom, for example, by setting the table at snack time or feeding the classroom hamster. Children are expected to wash their hands before snack time, keep personal belongings in their “cubby,” and put away toys before moving to a new activity.

Preschool-age children’s language skills are nurtured in a “language-rich” environment. Between the ages of 3 and 5, a child’s vocabulary grows from 900 to 2,500 words, and her sentences become longer and more complex. In a conversational manner, and without dominating the discussion, teachers help children stretch their language skills by asking thought-provoking questions and introducing new vocabulary during science, art, snack time, and other activities. Children have many opportunities to sing, talk about favorite read-aloud books, and act out stories.

A young child’s cognitive skills are strengthened by engaging in a wide range of hands-on activities that challenge her to observe closely, ask questions, test her ideas or solve a problem. To nurture their curiosity and motivation to learn, teachers use children’s interests and ideas to create activities. And even a simple, chance event – such as a child’s discovery of a snail in the outdoor play area — can be turned into an exciting opportunity to learn.

Preschool-age children have active imaginations and learn through make-believe play. Teachers know that the line between reality and fantasy is often not clear to a young child. Sometimes this results in fears of monsters under the bed. But imagination also fuels learning. The imaginary play area in a high-quality preschool is well-stocked with costumes, “props,” and child-size household items such as stoves, sinks and cupboards. It’s often in this activity area that preschool-age children progress steadily from solitary play, to one-on-one play, to complicated group play.

Young children show growing interest in pre-math and pre-literacy skills. To prepare children for the academic demands of kindergarten, teachers offer a wide variety of games and activities that help children acquire the pre- math and literacy skills.

 Engaging children in a discussion about an exciting read-aloud story encourages their listening, comprehension, and expressive language skills. Playing with magnetic alphabet letters may inspire a child to ask a teacher to help her write the first letter of her name.

Matching games, sorting games, counting games, and board games build children’s understanding of number, categories and sequence, which supports later math learning. Putting together puzzles encourages children to notice patterns, plan ahead and problem-solve.

To sustain children’s excitement and motivation for learning, high-quality preschool and child care programs introduce early literacy and math skills not as isolated exercises, but in the context of activities that are interesting and meaningful to children.

Physical coordination improves, allowing the child to explore her environment — and to challenge herself-in new ways. Young children are in motion for a good part of the day. High-quality preschool programs provide several opportunities daily for children to run, climb, and play active games. Activities are offered to help children develop fine motor skills, such as threading beads or cutting with scissors. And children are challenged through a variety of activities to build their hand-eye coordination and balance.

Fortunately, in selecting a preschool, parents aren’t forced to choose between protecting a child’s play time and making sure she’s ready for kindergarten. A high-quality early childhood education program will offer children both.